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संस्कृत सौरभ|

 श्री कृष्ण स्तुति|
१)अधरम मधुरम, वदनम मधुरम |
नयनम  मधुरम, हसितम मधुरम |
ह्रदयम मधुरम, गमनम मधुरम |
मधुराधिपते  अखिलम मधुरम |
२)अकाल मृत्यु हरणम, सर्व व्याधि निवारणम|
समस्त दुरितोपशमनम |
श्री विष्णु पादोदकम परम पावनम |
२)सुभाषितें |
१)जन्मना जायते मूर्खः
(जन्मतः मनुष्य   नादान  है)
कर्मणा द्विज उच्यते |
(संस्कार पाने के बाद द्विज कहलाता है)
वेदाध्ययनतो  विप्रः |
(वेदों के अध्ययन से  विप्र बनता है)
ब्रह्मज्नानेना ब्राह्मण |
( परब्रह्म के बारे में  जानकारी
प्राप्त होने के बाद वह ब्राह्मण बनता है)
२)पद्माकरम दिनकरो विकचम करोति |
(सूरज कमल पुष्प को विकसित करता है)
चन्द्रो विकासयती कैरव चक्रवालम |
(चन्दा कुमुद पुष्प को खिलाता है )
नाभ्यर्थी जलधरोपि जलम ददाति |
(बिना मांगे घटाएँ पानी बरसातें हैं )
संत स्वयं परहितें विहिताभियोगः |
(अच्छे लोग हमेशा परोपकार करते रहते हैं )
मूल :संग्रह.

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